Sunday, 20 November 2016

शफ़क़त अमानत अली बनाम देशभक्ति

परसों दोपहर से ही एक भयानक दुविधा से ग्रसित हूँ। कुछ सुझाव दें।
ऐसा है, कि संगीत जगत में एक महान विभूति हुए, उस्ताद अमानत अली खान। जब लता मंगेशकर 1945 में मुंबई आयीं, तो शास्त्रीय संगीत की शिक्षा उन्हें सबसे पहले उन्ही से मिली। जब आज़ादी के बाद देश का बंटवारा हुआ, तो उस्ताद अमानत अली खान साहब पाकिस्तान चले गए। उनके दो पुत्र हुए, असद अमानत अली खान, और शफ़क़त अमानत अली खान।
रॉकस्टार उस्ताद कहे जाने वाले शफ़क़त अमानत अली खान का मैं बहुत बड़ा प्रशंसक हूँ। रॉक म्यूजिक, सूफी मासिकी से लेकर शास्त्रीय संगीत तक उनकी काफी अच्छी पकड़ है। कल दोपहर से उनके दर्जनों गाने यूट्यूब पर सुन चुका हूँ, और वो भी सेना राहत कोश में बिना एक भी रूपए दिये। साथ ही साथ राहत फतेह अली खान, मेहंदी हसन, नुसरत साहब, सज्जाद अली के भी गाने मुझे भारतीय गायकों से ज्यादा पसंद हैं।
मैं पाकिस्तान जाना नहीं चाहता। मैं हिंदुस्तान में ही रहकर इनके गाने सुनते हुए अपनी ज़िंदगी ज़ीना चाहता हूँ। क्या ये मुझे देशद्रोही बनाता है?
नोट: कृपया डेढ़-श्याणे लोग कमेंट न करें। जिन्हें हद से ज्यादा देशभक्ति समा जाने के कारण गाली-गलौज का मन कर रहा हो, वो मुझसे मेरे बेगुसराय स्थित निवास पर मिलें। घर के आगे और पीछे डेढ़-डेढ़ कट्ठा ज़मीन छोड़ रखा है। वहीं गाड़ दूंगा।

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