सहमी सहमी हुई जाँ खूब सितम सहती है,
आज वादी में सियासत की हवा बहती है
आज वादी में सियासत की हवा बहती है
लगा के पहरे मेरी तंग ज़ुबाँ पर कहते,
हम तो हमराज़ हैं, तू बोल जो भी कहती है
हम तो हमराज़ हैं, तू बोल जो भी कहती है
जो हुआ शोर-ऐ-इंकलाब मची चीखो-पुकार,
तड़तड़ाहट-ओ-धमाकों में दबी रहती है
तड़तड़ाहट-ओ-धमाकों में दबी रहती है
है टंगी चौक पर लथपथ सनी बेनाम वो लाश,
नाम देने की उसे होड़ तभी रहती है
नाम देने की उसे होड़ तभी रहती है
दांतों के बीच ज़ुबाँ-से घिरे बेबस हैं के हम,
कैसे कह दें जो बात दिल में अभी रहती है
कैसे कह दें जो बात दिल में अभी रहती है
No comments:
Post a Comment