Sunday, 20 November 2016

देशभक्ति का लिटमस टेस्ट


बोल तो नहीं रहे होंगे, लेकिन ईमानदारी से झांकिए तो मोदीजी के इस ऐतिहासिक कदम के बाद कईयों लकड़बग्घों की देशभक्ति आज मुंह को ओढ़नी से ढके, आपत्तिजनक अवस्था में पकड़ी गई।
भर पेट खाना खाकर पाकिस्तान को गाली देने वाले, शिफूजी शौर्य भारद्वाज के बेहूदे वीडियो की हर एक गाली पर बल खा कर मचलने वाले, युद्ध-पराक्रम के ऊपर गरीबी-उन्मूलन के पक्षधरों को वामी-कौमी-शेखू और न जाने क्या क्या कहने वालों में से कइयों को आज देश के लिए दो घंटे बैंक के लाइन में लगने में हालत पस्त हो रही है। कइयों को तो अचनाक गरीबों तक की फ़िक्र हो आई है। कइयों ने तो झटपट सोना खरीद कर अपनी दूरदर्शिता का परिचय भी दे दिया है।
का जी, कौन जात से हो? ऐसे हराओगे पाकिस्तान को, घर बैठे? चीन का बहिष्कार कर के हू-चिंताओ को सुदामा बना दोगे? वीर रस की कविता को माइक पर चीख-चीख पढ़ हाफ़िज़ सईद को बहरा कर दोगे? तुम्हारी न पटेगी मोदीजी से। मेरे प्यारे मुँहबोले राष्ट्रवादियों, अगली बार जब किसी को 'जन-गण-मन' के दौरान बैठा देख कर पीटने का मन करे, तो एक बार सोच लेना। हो सकता है वह बैंक की लाइन से थका लौटा हो।
बाकी जो है सो तो हइये है।

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